अद्वैत से त्रैत तक : मायावाद मीमांसा

अद्वैत से त्रैत तक : मायावाद मीमांसा

मायावाद जिसे हम नवीन वेदान्त भी कहते है | ऐसे हमारे बहुत से भाई है जिन्हें इस प्रकार की भ्रान्ति हों गई सब कुछ ईश्वर है सत्य कुछ भी नही सब मिथ्या है | जीव ईश्वर से निकलता है उसी मे ...

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परापूजा

परापूजा

भगवान शंकराचार्य ने आर्यावर्त में शास्त्रार्थ की परंपरा के माध्यम से नास्तिको से वेदों की रक्षा का महान प्रयास किया था और अनेको शुद्धिया करी थी | जिसके कारण स्वामी जी के आर्य ऋणी र ...

आर्य संस्कृति के रक्षक – मर्यादा पुरुषोत्तम राजा राम

आर्य संस्कृति के रक्षक – मर्यादा पुरुषोत्तम राजा राम

राम भारतीय जनमानस के अंतःकरण में बसा नाम | वो नाम जो प्रेरित करता हैं हमें किसी भी युद्ध में, किसी बुराई का विचार आते ही, राम का नाम हमें श्रेष्ठ आदर्शो का ध्यान दिलाते हैं | अठाईस ...

वैदिक एकईश्वरवाद

वैदिक एकईश्वरवाद

परमात्मा का अस्तित्व तो तर्क का विषय हैं अनुभूति के साथ-साथ पर परमात्मा का स्वरुप ऐसा विषय नहीं जिसे मनुष्य अपने अनुमान से रच ले | इसीलिए वेद जो कि हम आर्यो कि मान्यतानुसार परमात्म ...

परमात्मा का स्वरुप

परमात्मा का स्वरुप

संसार में जितने ईश्वर में विश्वास करने वाले लोंग हैं परमात्मा के भिन्न भिन्न स्वरूपों को मानते हैं | कुछ अपने ही ईश्वर को लेकर झगडा भी करते हैं कुछ सब सही हैं यह कहे कर ईश्वर अर्था ...

परमात्मा के विविध नाम

परमात्मा के विविध नाम

 किसी का भी संबोधन हम उसके नाम से करते हैं | नाम हमारे गुणों के सूचक हैं नियमानुसार रखे जाए अतः नाम गुण, कर्म और स्वभाव अनुसार रखे जाते हैं | उस परमात्मा के तो असंख्य गुण हैं हमें ...

जीवन का उद्देश्य

जीवन का उद्देश्य

क्यों हमने जन्म लिया ? आनंद भोग, क्या सिर्फ इसलिए ? इस जीवन के बाद हमारा क्या होगा ? भिन्न-२ मतवालो की भिन्न-२ मान्यताए हैं | किसी की मान्यता में हमने इसलिए जन्म लिया हैं के हम स्व ...

वैदिक एकईश्वरवाद

परमात्मा का अस्तित्व तो तर्क का विषय हैं अनुभूति के साथ-साथ पर परमात्मा का स्वरुप ऐसा विषय नहीं जिसे मनुष्य अपने अनुमान से रच ले | इसीलिए वेद जो कि हम आर्यो कि मान्यतानुसार परमात्मा कि हि वाणी हैं, परमात्मा के विषय को बड़े विस्तार से बताते हैं | वेद में वर्णित ईश्वर के स्वरुप से आर्य कुछ समय के लिए दूर हो गए more ...

October 20, 2012 (0) comments

आत्मोन्नति

आत्मोन्नति, यानी आत्मा कि उन्नति, स्वंय कि उन्नति, कैसे और किस प्रकार करनी होती हैं, यह विषय गंभीर चिंतन का हैं | आत्मा जो सदैव जाग्रत रहती है, कभी सोती नहीं उसके कल्याण के लिए क्या किया जाए | अब प्रश्न यह उठता हैं के हम पहले शरीर कि उन्नति करेंगे फिर आत्मा देखी जाएगी | शारीरिक उन्नति भी बहुत आवयश्क हैं शारीर more ...

May 31, 2013 (0) comments

ऋग्वेदभाष्यम् (प्रथम मंडल)

महर्षि दयानंद ने वेद भाष्यो का अनुवाद कर के मानव जाती पर बहुत बड़ा उपकार किया हैं | यजुर्वेद का सम्पूर्ण भाष्य ऋषि ने कर लिया था और ऋग वेद के ७वे मंडल के ६१वे सूक्त के दूसरे मन्त्र तक भाष्य ही कर पाए थे के बड़े षण्यंत्र के अंतर्गत उनको विष दे दिया गया | जितना भी भाष्य उपलब्ध हुआ उसी के आधार पर वेदों की सर्वोच more ...

July 27, 2013 (0) comments

परमात्मा के विविध नाम

 किसी का भी संबोधन हम उसके नाम से करते हैं | नाम हमारे गुणों के सूचक हैं नियमानुसार रखे जाए अतः नाम गुण, कर्म और स्वभाव अनुसार रखे जाते हैं | उस परमात्मा के तो असंख्य गुण हैं हमें परमात्मा के उन गुणों के बारे उसके भिन्न नामो के साथ वेद ज्ञान करते हैं | सृष्टि के आदि में मानवजाती के उत्थान के लिए परमात्मा ने आ more ...

March 30, 2012 (3) comments

भोजन से पूर्व एवं पश्चात के प्रार्थना मन्त्र

हम प्रातः कालीन मन्त्र, शयन कालीन मन्त्र और ईश्वरस्तुति प्रार्थना मन्त्र प्रस्तुत कर चुके है अब हम भोजन से पूर्व एवं पश्चात के प्रार्थना मन्त्र आपके समक्ष रखते है | इन २ मंत्रो को बालक-बालिकाओ को कंठस्थ कराये | कुछ विद्यालयों में शान्ति प्रार्थना मन्त्र भोजन पूर्व कराये जाते है वो हम सर्वप्रथम रखते है | ये शा more ...

December 19, 2013 (0) comments

आत्मोन्नति

आत्मोन्नति, यानी आत्मा कि उन्नति, स्वंय कि उन्नति, कैसे और किस प्रकार करनी होती हैं, यह विषय गंभीर चिंतन का हैं | आत्मा जो सदैव जाग्रत रहती है, कभी सोती नहीं उसके कल्याण के लिए क्या किया जाए | अब प्रश्न यह उठता हैं के हम पहले शरीर कि उन्नति करेंगे फिर आत्मा देखी जाएगी | शारीरिक उन्नति भी बहुत आवयश्क हैं शारीर more ...

May 31, 2013 (0) comments

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